Thursday, June 2, 2016

गीत मेरे




गीत मेरे तेरे होंठों  का चुम्बन 
जीवन मेरे तेरे मन का अर्पण 
यूँ  ही बीते मेरे क्षण-क्षण
आ मेरी बाँहो में जीवन चन्दन ।

बयार सुगंध को फैलाये 
तन मन में उमंग जगाये 
मेरा ह्रदय  तेरे मन में  समाये 
जान! मेरी जान क्यूँ  शर्माये 
खिले दोनों के तन उपवन-उपवन । 

फूल रख  दूँ  तेरे आँचल  में 
नृत्य भर दूँ तेरे पायल  में 
आन बसी मन पागल में 
दवा बन गयी तन घायल में 
मिटी  मन की हर 
उ ल झ न - उ ल झ न

 डोर सांसों की तेरे साथ जुडी 
प्रेम पतंग तेरे हाथ उडी 
हीरे सी जवानी मेरे नग जड़ी 
मिली नजरें जाने कौन  घडी
करा लिया मन कोरा कागज अंकन । 

 

तराजू

 


मन के  तराजू में 
तुलता  है 
मोह सम्मान 
जीवन  बाट  पैबंद लगा हृदय 
तन आवरण  है 
झूठा ठाट 
कर्मों  का गोदाम 
भर जाता  है, डर जाता है 
परिग्रहण  परिणाम 
मौत की प्रतीक्षा में 
टूटता  तराजू 
छूटता  गोदाम 
यूँ  ही हो जाता  है 
सम्पूर्ण  ये उम्र तमाम 
कैसे मुक्ति ही, कैसे युक्ति  हो 
किन परिणामों  से भरा हो 
कर्मों का गोदाम 
समझ न पाया कोई बनिया 
कंजूस रह गया भगवान 
न दी बुद्धि उसने 
न सरलता का दान 
अंगुली उठाने पर 
न करना प्रश्न  तुम 
अपनी भूलों को टालने का 
मार्ग  न मिला, सुबह से हुई शाम ।