गीत मेरे तेरे होंठों का चुम्बन
जीवन मेरे तेरे मन का अर्पण
यूँ ही बीते मेरे क्षण-क्षण
आ मेरी बाँहो में जीवन चन्दन ।
बयार सुगंध को फैलाये
तन मन में उमंग जगाये
मेरा ह्रदय तेरे मन में समाये
जान! मेरी जान क्यूँ शर्माये
खिले दोनों के तन उपवन-उपवन ।
फूल रख दूँ तेरे आँचल में
नृत्य भर दूँ तेरे पायल में
आन बसी मन पागल में
दवा बन गयी तन घायल में
मिटी मन की हर
उ ल झ न - उ ल झ न
डोर सांसों की तेरे साथ जुडी
प्रेम पतंग तेरे हाथ उडी
हीरे सी जवानी मेरे नग जड़ी
मिली नजरें जाने कौन घडी
करा लिया मन कोरा कागज अंकन ।

