ज्ञान जगाएँ अक्षर
किताबें बनाए साक्षर
क्युं निरर्थक देखें इधर-उधर
साथी आ चिंतन में जा उतर-उतर ।
चैन ये लाती है किताबें
लगन जगती है किताबें
चित अस्थिर ना हो तो
शांति दिलाती हैं किताबें
ना हो जा तू देखने पर निर्भर-निर्भर।
ज्ञान किताबों का मन में सजता
चरित्र शब्दों से ही सवंरता
भाषा में जिसके होता बल
जीवन में आगे वो ही बढ़ता
देर न कर नहा
शब्द हैं निर्झर-निर्झर।
किताबें खेल सिखाती हैं
किताबें ज्ञान बढाती हैं
किताबें सच्ची साथी हैं
अच्छा मार्ग दिखाती हैं
ज्ञान धूप में तपकर
प्यारे होजा प्रखर-प्रखर।








