थक गया, प्रेम का राही
पूर्व प्रेमियों का हश्र देख कर ।
चुक गया, प्रेम का खजाना
रीते ह्रदय का अक्स देख कर ।
अब तो केवल निर्वाह है
संसार की कुछ परवाह है
बिना प्रेम का जीवन गवाह है
रुक गया, वासना के पथ
लघु जीवनों का अंत देखा कर ।
कोई आ रुक जाता दरवाजे पर
कोई आ झुक जाता मेरे इशारे पर
कोई लुटा देता प्रेम ना चाहने पर
सोच लिया, प्रेम क लिए
जाते पलों का देख कर ।
अब आंसूओं की बरसात नहीं
किसी प्रतिमा का साथ नहीं
किसी गली की बात नहीं
छोड़ दिया, प्रेम के आधारों को
नींव विहीन ह्रदय सख्त देख कर ।
प्रेम से बड़ा दिन का बीतना
आंनद -बाग को शांति जल से सींचना
मोह की और ढलते मन को खींचना
तोड़ दिया, कोमल प्रेम के पत्तों को
डाली पर फूलों का अक्स देख कर ।

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