ओढे सोहे पर नाहीं खबरिया
मैली हो गई अपनी चदरिया।
जब-जब धोये फिर मैल आए
चदरिया को किससे छुपाएँ
कौन जुगत करे रहे धौली चदरिया।
दिन-दिन बीते और कट जाए
उमरिया के साथ चदरिया फट जाए
धूप धूल सहे, सहे पानी बदरिया।
ज्ञान साबुन अभ्यास जल से
शान्त जीवन ओ दूर छल से
चाहिए त्याग धूप से सूखी चदरिया।
मैली हो गई अपनी चदरिया।
जब-जब धोये फिर मैल आए
चदरिया को किससे छुपाएँ
कौन जुगत करे रहे धौली चदरिया।
दिन-दिन बीते और कट जाए
उमरिया के साथ चदरिया फट जाए
धूप धूल सहे, सहे पानी बदरिया।
ज्ञान साबुन अभ्यास जल से
शान्त जीवन ओ दूर छल से
चाहिए त्याग धूप से सूखी चदरिया।
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