खटराग सा लगता है
सोकर उठना
वही चाय, दूध, नाश्ता
नित कार्यालय को जाना
वही काम
देर रात घर लौटना
कुछ बातें, टी०वी०-सी०वी०
और सो जाना।
कुछ उलट-पुलट हो जाता
रविवार को
राग तोड़कर कुछ कर गुजरता
प्रतीक्षा हो जाती सोमवार की
दिनचर्या के आगे लगता
मैं लाचार
संभवत: मुझे हो गया
खटराग से प्यार।
बड़ी मुश्किल से करता
बदलाव को स्वीकार
अच्छा लगता
जब कोई स्वांग
बन जाए खटराग।
सोकर उठना
वही चाय, दूध, नाश्ता
नित कार्यालय को जाना
वही काम
देर रात घर लौटना
कुछ बातें, टी०वी०-सी०वी०
और सो जाना।
कुछ उलट-पुलट हो जाता
रविवार को
राग तोड़कर कुछ कर गुजरता
प्रतीक्षा हो जाती सोमवार की
दिनचर्या के आगे लगता
मैं लाचार
संभवत: मुझे हो गया
खटराग से प्यार।
बड़ी मुश्किल से करता
बदलाव को स्वीकार
अच्छा लगता
जब कोई स्वांग
बन जाए खटराग।
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