राख में चिंगारी छूट गई है
आस से ये जड़ता टूट गई है।
जला देती चिंगारी ख़्वाबों के महल
आज जलता है, साथ जलता है कल
यूँ ही चलने की भावना रूठ गई है।
जला देती चिंगारी एकरसता के मन को
मिला देती राख मन की उलझन को
सच के खजाने की चाभी लूट गई है।
जला देती चिंगारी निशा के कबाड़ को
यूँ ही उग...आए झार-झंखाड़ को
मंजिल में मार्ग की बाधा मिट गई है।
आस से ये जड़ता टूट गई है।
जला देती चिंगारी ख़्वाबों के महल
आज जलता है, साथ जलता है कल
यूँ ही चलने की भावना रूठ गई है।
जला देती चिंगारी एकरसता के मन को
मिला देती राख मन की उलझन को
सच के खजाने की चाभी लूट गई है।
जला देती चिंगारी निशा के कबाड़ को
यूँ ही उग...आए झार-झंखाड़ को
मंजिल में मार्ग की बाधा मिट गई है।

ख्वाबों के महलों का जलना.....। भावपूर्ण अभिव्यक्ति।
ReplyDeleteधन्यवाद!
Deleteख्वाबों के महलों का जलना.....। भावपूर्ण अभिव्यक्ति।
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