Thursday, May 26, 2016

बेरंग



रंगो का   मेल 
जीवन  में क्या 
बस एक रंग जी लें 
दूसरा रंग  आते ही 
मन होता परेशान 
क्या अजब है इंसान 

सब रंगो को पाकर 
बेरंग  होता जीवन 
जीना होता अनमन 
आदत सी हो जाती 
रंग भाते नहीं 
छोड़ने के भाव आते नहीं 
जीवन का गान, जाता है रूठ 
सुख-चैन  स्वयं का जाता है छूट 

भ्रम  एक सवार होता 
रंगो में न जीना ही 
जीने के  सामान होता 
रंग जीवन में व्याप्त होकर 
न होते जीवन का सार 
खोज न पाते रंग के पार 
साथ  रहता, रंग युक्त  बेरंग जीवन 
अस्थिर  तन-मन । 


 

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