Thursday, May 26, 2016

ज्ञान जगाएँ


ज्ञान जगाएँ  अक्षर 
किताबें बनाए साक्षर 
क्युं निरर्थक देखें  इधर-उधर 
साथी  आ चिंतन में जा उतर-उतर । 

 चैन ये लाती है किताबें 
लगन जगती है किताबें 
चित अस्थिर  ना  हो तो
शांति दिलाती हैं किताबें 
ना हो जा तू देखने पर निर्भर-निर्भर। 

ज्ञान किताबों  का मन में सजता 
चरित्र शब्दों  से ही सवंरता 
भाषा में जिसके होता बल 
जीवन  में आगे वो ही बढ़ता 
देर न कर नहा 
शब्द  हैं  निर्झर-निर्झर। 

किताबें खेल सिखाती  हैं 
किताबें ज्ञान बढाती  हैं 
किताबें सच्ची साथी हैं 
अच्छा  मार्ग  दिखाती हैं 
ज्ञान धूप  में तपकर
प्यारे होजा प्रखर-प्रखर। 

1 comment:

  1. सच किताबें ज्ञान का भण्डार है
    जीवन का आधार हैं


    बहुत सुन्दर रचना

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