Friday, May 13, 2016

मंगल गान




मंगल सुनाने को हम हैं आए
कह रहे बात जो मन में छुपाए।

जीवन सागर तन नय्या, खेते हम जाते हैं
कभी उस पार या इस पार हम आते हैं
आशा ने क्या-क्या भ्रम हैं बनाए।

आए तो पराये थे, गए वो अपनो से
कल तक साथ थे, आज हैं सपनों से
मृत्यु ने सब रूप हैं दिखाए।

डिग्री है बड़ी सी, पर काम न मिलता हैं
हमें अपनी प्रतिभा का दाम न मिलता हैं
बेकारी से सब हैं उकताए।

आस्था मंगल, ज्ञान मंगल, कर्म ही मंगल है
सब धर्मों में, मानव धर्म ही मंगल है
सबका हो मंगल भावना ये भाएँ।

4 comments:

  1. सबकी मंगल कामना में ही अपना मंगल निहित होता है .. बहुत सुन्दर सर्व मंगल गीत

    ReplyDelete